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Wednesday, February 8, 2017

सौंफ और इलाइची के फायदे The advantages of fennel and cardamom

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सौंफ और इलाइची  के फायदे
The advantages of fennel and cardamom
saunf

  
सौंफ प्रत्येक घर में होती है। इसकी मीठी खुशबू और स्वाद सभी को बहुत अच्छे लगते है। खाना खाने के बाद थोड़ी सी सौंफ और मिश्री मुँह में रखकर चबाने का अलग ही मजा है। इससे मुँह की बदबू तो जाती ही है दाँत भी साफ हो जाते है।इलायची किसी भी भारतीय परिवार में देखे जाने वाले सबसे आम मसालों में से एक है। यह न केवल मीठे और स्वादिष्ट व्यंजनों में डाली जाती है बल्कि एक माउथ फ्रेशनर के रूप में भी इस्तेमाल होती है। बा, आयरन और रिबोफ्लेविन, विटामिन सी तथा नियासिन जैसे आवश्यक विटामिन इलायची के अन्य प्रमुख घटक हैं। लाल रक्त कोशिकाओं और सेलुलर उपापचय के उत्पादन में अत्यधिक महत्व के लिए प्रचलित तांबा, आयरन, रिबोफ्लेविन, विटामिन सी तथा नियासिन के साथ एनीमिया से लड़ने में मदद करता है और इस स्थिति में होने वाले लक्षणों से राहत दिलाता है। लेकिन इस नरम हरी फली के पास सेहत के लिए और भी बहुत कुछ है।सौंफ खाने के सिर्फ ये ही फायदे  नहीं है।छोटी से यह सौंफ कितनी गुणकारी हो सकती ये जानकर आश्चर्य होता है। हेल्थ के लिए इससे सस्ता , सुलभ और स्वादिष्ट नुस्खा शायद ही कोई होगा।बारीक सौंफ और मोटी सौंफ ये दो प्रकार की सौंफ बाजार में मिलती है। इनमे बारीक सौंफ चबाने के लिए अच्छी होती ही और मोटी सौंफ अचार बनाने , सब्जी बनाने में आदि में काम आती है।सौंफ में औषधीय गुण होते है। यह वात , पित्त और कफ तीनो प्रकार के दोष मिटाती है।

पाचन में सुधार :- खाना खाने के बाद सोंफ खाने से खाना आसानी से पचता है। मुँह से बदबू  खाने की गंध मिटती है। सौंफ के तत्व पेट में पाचन के लिएजरुरी एंजाइम और रस का स्राव बढ़ाते है। साथ की पेट और आँतों से जलन व सूजन आदि मिटाकर पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ाते है।भूख बंद हो तो खुलकर लगने लगती है। सौंफ कब्ज होने से बचाती है। सोंफ में एसिडिटी मिटाने का गुण होता है। इसके उपयोग से कई प्रकार की एसिडिटी मिटाने वाली दवा बनाई जाती है।क्या आपने कभी सोचा है कि भोजन के बाद सौंफ एक मुख्य खाद्य पदार्थ क्यों है? बहरहाल, ऐसा इसलिए है क्योंकि इलायची की प्रकृति वातहर है और यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने, हृदय की जलन को दूर करने और मतली को रोकने में मदद करती है। माना जाता है कि यह श्लेष्मा झिल्ली को शांत करती है ताकि वह ठीक से कार्य कर सकें और जिससे अंततः एसिडिटी और पेट की खराबी के लक्षणों से राहत मिलती है। इसके अलावा, आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह पेट में जल और वायु के गुणों को कम करती है जिससे वह भोजन को कुशलता से पचाने में सक्षम होता है।

मुंह की दुर्गंध को समाप्त करना:- सौंफ में कई तरह के सुगंधित तेल होते हैं जो मुँह से बदबू को दूर करता है। सौंफ मुंह में छिपे हुए खाद्य पदार्थों को निकाल कर हजम करने में मदद करता है। इसीलिए इसे माउथ फ्रेशनर भी कहा जाता है यदि आपके मुंह से दुर्गंध आती है और आप उपचार की हर कोशिश कर चुके हैं तो एकबार इलायची आज़माइए। इस मसाले में एंटीबैक्टीरियल गुण, तेज स्वाद और एक भीनी सी महक हैं। इसके अलावा, यह आपके पाचन तंत्र को सुधारती है- जो कि दुर्गंध के प्रमुख कारणों में एक है|यह समस्या के मूल कारण को दूर करने में बहुत प्रभावशाली है।
ह्रदय रोग – Heart :- सौंफ में प्रचुर मात्रा में फायबर होते है। इसकी वजह से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने में सहायक होते है। यह हानिकारक LDL कीमात्रा को कम करके दिल की बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा सोंफ में पाये जाने वाले तत्व रक्त वाहिकाओं की दीवार को हानिकारक फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते है। धमनियों को स्वस्थ बनाये रखते है। इससे ह्रदय रोग से बचाव होता है। पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों से भरपूर इलायची आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए एक सोने की खान है। पोटैशियम आपके रक्त, शरीर के तरल पदार्थ और कोशिकाओं का एक मुख्य तत्व है। इन आवश्यक खनिजों की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति करके इलायची आपके हृदय रेट को नियमित करने में मदद करता है और आपके रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।

बदहजमी और कब्ज़ से राहत दिलाती है :- यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हों, तो तत्काल एक इलायची खा लें। केले पच जाएँगे और आपको हल्कापन महसूस होगा। सौंफ बदहजमी को दूर करती है। जैसे ही आप सौंफ को चबाना शुरू करते हैं इसमें जो ज़रूरी तत्व होते हैं वे पाचन क्रिया का काम करना शुरू कर देते हैं। साथ ही इसमें जो फाइबर होता है वह मल को नरम करके कब्ज़ की समस्या को दूर करती है।

ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए फायदेमंद:- जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो वे इलायची का नियमित रूप से इस्तेमाल करें एैसा करने से ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है और आराम भी मिलता है। सौंफ में नाइट्राइट और नाइट्रेट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये दोनों यौगिक नए रक्त कोशिकाओं के बनने और संख्या को बढ़ाने में सहायता करती है। यह लार में नाइट्राइट की मात्रा को बढ़ाकर नैचरल तरीके से ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित करती है।

हाथ पैरों की जलन एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ और एक चम्मच धनिया रात को भिगो दें। सुबह मसल कर छान ले। इसमें मिश्री मिलाकर पियें। कुछ दिन रोजाना पीने से हाथ पैरों की जलन में आराम मिलता है।गर्मी के मौसम में पी जाने वाली ठंडाई में सौंफ एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होती है। यह ठंडाई पेट की जलन , हाथ पैरों की जलन , आँखों की जलन चक्कर आना आदि परेशानियों को मिटाकर शरीर और दिमाग में तरावट लाती है।
छाले:-  मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर उसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखें। तुरंत लाभ होगा।
जी मिचलाना:- बहुतों को यात्रा के दौरान बस में बैठने पर चक्कर आते हैं या जी घबराता है। इससे निजात पाने के लिए एक छोटी इलायची मुँह में रख लें।
मासिक धर्म (periods) के दर्द से राहत दिलाता है- सौंफ श्रोणि (pelvic) और गर्भाशय के जगह (uterine area) में रक्त को नियमित और संतुलित रूप से प्रवाह करवाकर मासिक धर्म के दौरान दर्द से राहत दिलाती है। जर्नल ऑफ रिसर्च इन आयुर्वेद के अनुसार जो महिलायें मासिक धर्म के दौरान सौंफ का सेवन करती हैं, उनको दर्द का कष्ट कम सहना पड़ता है।
टिप- एक पैन में ज़रूरत के अनुसार पानी लें और उसमें एक बड़ा चम्मच सौंफ डालकर उसको तब तक उबालें जब तक कि पानी का रंग न बदल जाये। उसके बाद काढ़े को छान लें। मासिक धर्म के दौरान गुनगुना गर्म काढ़े का सेवन करने से दर्द से राहत मिलती है।
वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने में :-
इलायची के इस्तेमाल से सेक्स लाइफ भी बेहतर होती है. इससे शरीर को ऊर्जा तो मिलती है ही साथ ही नपुंसकता में भी इसका सेवन करना फायदेमंद माना जाता है

 




 


















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