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Thursday, January 12, 2017

लकवा का आयुर्वेदिक उपचार PARALYSIS TREATMENT

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लकवा का आयुर्वेदिक उपचार (paralysis Treatment )

लकवा को आयुर्वेद में पक्षाघात रोग भी कहते हैं। इस रोग में रोगी के एक तरफ के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं जैसे बांए पैर या बाएं हाथ का कार्य न कर पाना। साथ ही इन अंगों की दिमाग तक चेतना पहुंचाना भी निष्क्रिय हो जाता है। और इस रोग की वजह से अंगों का टेढापनए शरीर में गरमी की कमीए और कुछ याद रखने की क्रिया भी नष्ट हो जाती है। लकवा रोग में इंसान असहाय सा हो जाता है। और दूसरों पर हर काम के लिए निर्भर होना पड़ता है। 

कारण :- मांसपेशियों की दुर्बलता, नाड़ियों की कमजोरी तथा बढ़ता हुआ रक्तचाप इस रोग के प्रमुख कारण हैं। जो व्यक्ति अधिक मात्रा में गैस पैदा करनेवाले पदार्थों का सेवन करते हैं, अव्यवस्थित व अत्यधिक संभोग करते हैं, विषम आहार का सेवन करते हैं, ज्यादा व्यायाम करते हैं उन्हें भी यह रोग चपेट में ले लेता है। इसके अलावा उल्टी या दस्तों का अधिक होना, मानसिक दुर्बलता, अचानक शॉक लगने आदि कारणों से भी पक्षाघात या लकवा हो जाता है।

अचानक शॉक लगना (Sudden Shock Loss)
मानसिक दुर्बलता (Mental impairment)
बढ़ता हुआ रक्तचाप (Increased blood pressure)
 विषम आहार का सेवन (Odd dietary intake)

लक्षण :- लकवा रोग में शरीर की नसों को पूरी तरह से सुखा देता है। जिसकी वजह से शरीर के अंगों पर खून नहीं पहुचं पाता है। और शरीर का अंग किसी काम का नहीं रह जाता है।पक्षाघात के लक्षण आसानी से पहचान में आ जाते हैं: आकस्मिक स्तब्धता या कमज़ोरी ख़ासतौर से शरीर के एक हिस्से में; आकस्मिक उलझन या बोलने, किसी की कही बात समझने, एक या दोनों आंखों से देखने में आकस्मिक तकलीफ़, अचानक या सामंजस्य का अभाव, बिना किसी ज्ञात कारण के अचानक सरदर्द या चक्कर आना। चक्कर आने या सरदर्द होने के दूसरे कारणों की पड़ताल के क्रम में भी पक्षाघात का निदान हो सकता। ये लक्षण संकेत देते हैं कि पक्षाघात हो गया है और तत्काल चिकित्सकीय देखभाल की ज़रूरत है। जोख़िम के कारक उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, डाइबिटीज़ और धूम्रपान पक्षाघात का जोख़िम पैदा करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। इनके अलावा अल्कोहल का अत्यधिक सेवन, उच्च रक्त कॉलेस्टेराल स्तर, नशीली दवाइयों का सेवन, आनुवांशिक या जन्मजात परिस्थितियां, विशेषकर रक्त परिसंचारी तंत्र के विकार।लकवा आधे शरीर की नाड़ियों व नसों को सुखाकर रक्त संचरण में व्यापक बाधा पहुंचा देता है। इसके कारण शरीर की संधियों तथा जोड़ों में शिथिलता आ जाती है। ग्रसित अंग स्वयं उठ नहीं पाते, भार उठाने तथा चलने की क्षमता पूर्णत: समाप्त हो जाती है। यदि मुंह लकवाग्रस्त हो जाए तो मुंह के अंग भी स्थिर हो जाते हैं, गरदन एक तरफ झुक जाती है, बोलने की शक्ति नष्ट हो जाती है, आखों में दर्द व फड़कन आ जाती है। शरीर में कपकपी होने लगती है। व्यक्ति कुरूप दिखने लगता है।

 

लकवे का इलाज (Treatment of paralysis) :-

लकवा (Paralysis) होने पर रोजाना दूध में छुहारे भिगोकर Patient को खिलाये। इससे धीरे धीरे लकवा (Paralysis) ठीक हो जाता है।

लकवा (Paralysis) Body के अंगो पर पड़ता है। काली मिर्च (Black pepper) के पाउडर को देशी घी (Ghee) में मिलाकर लेप बनाये। अब इस लेप से Body के उस हिस्से की Massage करे जो लकवा ग्रस्त है।

नाशपाती, सेब और अंगूर का रस बराबर मात्रा में एक ग्लिास में मिला लें। और रोगी को देते रहें। कुछ समय तक यह उपाय नित्य करना है तभी फायदा मिलेगा।

 1 चम्मच काली मिर्च को पीसकर उसे 3 चम्मच देशी घी में मिलाकर लेप बना लें और लकवाग्रसित अंगों पर इसकी मालिश करें। एैसा करने से लकवा ग्रस्त अंगों का रोग दूर हो जाएगा।

शरीर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। स्ान करते समय रीढ़ की हड्डी में नल का पानी तीव्र गति से गिरने दें।

 

प्रसन्नता और उत्साह लकवा को दूर रखता है।

 

अखरोट के तेल की मालिश और सेमल के पत्तों का बफारा लेने से मुंह का लकवा जल्दी ठीक हो जाता है।

 

6 कली लहसुन को पीसकर उसे 1 चम्मच मक्खन में मिला लें और रोज इसका सेवन करें। लकवा ठीक हो जाएगा।

तुलसी के पत्तोंए दही और सेंधा नमक को अच्छे से मिलाकर उसका लेप करने से लकावा ठीक हो जाता है। ये उपाय लंबे समय तक करना होगा |

लकवाग्रस्त व्यक्ति को काजू का भरपूर सेवन कराना चाहिए। । किशमिशः नियमित रूप से किशमिश के सेवन से इस रोग में काफी लाभ होता है।

एक गिलास दूध में थोड़ी सी दालचीनी और एक चम्मच अदरक का पाउडर यानि कि सोंठ को मिलाकर उबाल लें। और नियमित इसका सेवन करें। इस कारगर उपाय से लकवा रोग में आराम मिलता है।

रोजाना 50 ग्राम शहद खाने से लकवे (Paralysis) से ग्रस्त अंग ठीक होने लगते है।

पानी पर्याप्त पीना चाहिए ताकि पेट की सफाई यथा समय होती रहे।

 

सुबह शाम टहलना, प्राकृतिक भोजन, व्यायाम-मालिश, मनोरंजन, प्राणायाम, ध्यान तथा ईश्वर की प्रार्थना जैसे सद्कर्मों में संलग्न हो जायें। शवासन अत्यन्त लाभकारी है।

 

 रात को सोने से पहले तांबे के बर्तन में पानी रखे, और इस बर्तन में एक चाँदी का सिक्का भी डाल दे। सुबह से पानी को खाली पेट पिए। लकवा (Paralysis) से छुटकारा पाने का ये अच्छा और सस्ता उपाय है।

 

 शुद्ध देशी गाय के घी की 2 बून्द रोजाना नाक में डालने से लकवे (Paralysis) के मरीज को लाभ होता है।

 

लकवा (Paralysis) की Disease से जल्दी छुटकारा पाने के लिए अखरोट के तेल (Walnut oil) की मालिश (Massage) करनी चाहिए।

 

मुँह का लकवा (Paralysis of mouth) होने पर सेमल के पत्तों का बफारा लेना चाहिए।

 

रोजाना करेले की सब्जी खाने या करेले का रस पीने से लकवा (Paralysis) ग्रस्त Body के अंगो में धीरे धीरे सुधार होने लगता है।

 

कलौंजी के तेल (Fennel oil) को गुनगुना करके Body के Massage करने से लकवे Paralysis) की बीमारी को जल्दी ठीक किया जा सकता है।



लकवा में क्या खाएं क्या ना खाएं। :- लकवा (Paralysis) एक खतरनाक Disease है, जिसका समय पर इलाज ना करने पर इंसान अपाहिज का जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है। इस Disease का इलाज जितना जरुरी है, उतना ही जरुरी इस Disease में परहेज करना है। लकवे के मरीज को साग का सेवन ना करें, चावल, चना, छाछ, बेसन, कम और बार-बार खाना और आहार की कम मात्रा, वसायुक्त आहार और तली हुई चीजो का जरा सा भी सेवन नहीं करना चाहिए।









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