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Wednesday, January 4, 2017

गुर्दे की पथरी का इलाज , kidney Stone Treatment

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गुर्दे की पथरी का इलाज (kidney Stone Treatment)

kidney Stone Treatment



गुर्दे की पथरी (वृक्कीय कैल्कली, नेफरोलिथियासिस) (अंग्रेजी:Kidney stones) मूत्रतंत्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें, वृक्क (गुर्दे) के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर सदृश कठोर वस्तुओं का निर्माण होता है। गुर्दें में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं , किन्तु यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी हो जाएं ( २-३ मिमी आकार के) तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आसपास असहनीय पीड़ा होती है।गलत खानपान और ज्यादा कैल्शियम वाली डाइट लेने से पथरी (स्टोन) की प्रॉब्लम हो जाती है। कई बार यह प्रॉब्लम बड़ी होने पर डॉक्टरी ट्रीटमेंट लेना जरूरी हो जाता है लेकिन अगर यह प्रॉब्लम छोटे स्तर की है, तो इसे घर पर ही कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर ठीक किया जा सकता है। गुर्दे की पथरी अलग अलग आकार की हो सकती है| कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत हीं छोटे आकार के होते हैं तो कुछ बहुत हीं बड़े। आमतौर पर छोटे मोटे पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाया करते हैं लेकिन जो पथरी आकार में बड़े होते हैं वे बाहर नहीं निकल पाते एवं मूत्र के बाहर निकलने में बहुत ही बाधा डालते हैं उससे बहुत हीं ज्यादा पीड़ा उत्पन्न होती है। पथरी का दर्द कभी-कभी बर्दाश्त से बाहर हो जाता है।गलत खानपान और ज्यादा कैल्शियम वाली डाइट लेने से पथरी (स्टोन) की प्रॉब्लम हो जाती है। कई बार यह प्रॉब्लम बड़ी होने पर डॉक्टरी ट्रीटमेंट लेना जरूरी हो जाता है लेकिन अगर यह प्रॉब्लम छोटे स्तर की है, तो इसे घर पर ही कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर ठीक किया जा सकता है।

गुर्दे की पथरी के लक्षण( Symptoms ) :- गुर्दे की पथरी के ज्यादातर रोगी पीठ से पेट की तरफ आते भयंकर दर्द की शिकायत करते हैं

 रुक रुककर पेशाब

उलटी दस्त
यदि मूत्र संबंधी प्रणाली के किसी भाग में संक्रमण है तो इसके लक्षणों में बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, पेशाब आने के साथ-साथ दर्द होना आदि भी शामिल हो सकते हैं ; बार बार और एकदम से पेशाब आना, रुक रुक कर पेशाब आना, रात में अधिक पेशाब आना, मूत्र में रक्त भी आ सकता है। अंडकोशों में दर्द, पेशाब का रंग असामान्य होना

यह रोग का प्रमुख लक्षण है, इसमें मूत्रवाहक नली की पथरी में दर्दो पीठ के निचले हिस्से से उठकर जांघों की ओर जाता हैगुर्दे की पथरी के कारण (Reason of Kidney Stone) :-

किसी पदार्थ के कारण जब मूत्र सान्द्र (गाढ़ा) हो जाता है तो पथरी निर्मित होने लगती है। इस पदार्थ में छोटे छोटे दाने बनते हैं जो बाद में पथरी में तब्दील हो जाते है। इसके लक्षण जब तक दिखाई नहीं देते तब तक ये मूत्रमार्ग में बढ़ने लगते है और दर्द होने लगता है। इसमें काफी तेज दर्द होता है जो बाजू से शुरु होकर उरू मूल तक बढ़ता है।
फॉस्फेट और कॉर्बोनेट के पत्थरों की सतह मुलायम होती है और ऑक्जेलेट के पत्थरों की खुरदुरी । इस कारण से ऑक्जेलेट के पत्थरों के कारण खून भी निकल सकता है।
पेशाब की पथरी पेशाब में उपस्थित लवणों व खनिजों के जमाव से बनती हैं। जब लवणों और खनिजों की परतें विभिन्न जगहों पर जमा होती जाती हैं तो इन महीन पत्थरों का आकार बढ़ता जाता है। ये सभी लवण और खनिज खाने की चीजों व पानी से शरीर में आए होते है। कुछ सब्जियां जैसे पालक, अरबी के पत्ते और टमाटरों में बहुत अधिक लवण होते हैं।
किसी प्रकार से पेशाब के साथ निकलने वाले क्षारीय तत्व किसी एक स्थान पर रुक जाते है,चाहे वह मूत्राशय हो,गुर्दा हो या मूत्रनालिका हो,इसके कई रूप होते है,कभी कभी यह बडा रूप लेकर बहुत परेशानी का कारक बन जाती है,पथरी की शंका होने पर किसी प्रकार से इसको जरूर चैक करवा लेना चाहिये ! नए वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण किडनी में पथरी की समस्या में आम तौर पर तेजी से वृद्धि होगी। कुछ खास क्षेत्रों में यह समस्या बहुत तेजी से बढ़ेगी। इन क्षेत्रों को किडनी स्टोन बेल्टका नाम दिया गया है।
गुर्दे की पथरी के प्रकार:- वैसे तो पथरी शरीर के अनेक अंगो में पायी जा सकती है किन्तु मुख्यतः ये शरीर में निम्नलिखित जगह होती है
     गुर्दे में पथरी ( Calculus in Kidney )

    पित्त की थाली में पथरी ( Calculus in Bladder )

    मुत्रवाहिनी में पथरी ( Calculus in Urinary )

उपचार :- पथरी के मरीज को दिन में कम से कम 5-6 लीटर पानी पीना चाहिये। पथरी होने पर पर्याप्त जल पीयें ताकि 2 से 2.5 लीटर मूत्र रोज बने। अधिक मात्रा में मूत्र बनने पर छोटी पथरी मूत्र के साथ निकल जाती है
करेला वैसे तो बहुत कड़वा होता है परन्तुो पथरी में यह रामबाण की तरह काम करता है। करेले में मैग्नीुशियम और फॉस्फो‍रस नामक तत्वब होते हैं, जो पथरी को बनने से रोकते
ऐसा भोजन करें जिनमें आक्जेलेट् की मात्रा अधिक हो; जैसे चाकलेट, सोयाबीन, मूंगफली, पालक, आदि के साथ कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें। 
नारंगी आदि का रस (जूस) लेने से पथरी का खतरा कम होता है।
15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।
किडनी के सेहत के लिए नारियल काफी फायदेमंद है। नारियल पानी पथरी को गलाता है। पथरी होने पर नारियल पानी सुबह पीना चाहिए।
जामुन डाइबिटीज समेत कई बीमारियों में रामबाण का काम करता है। पथरी के इलाज में भी यह काफी असरदार है।
अंगूर में एल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता हैं, इसलिए किडनी में स्टोंन के उपचार के लिए अंगूर को बहुत ही उत्तम माना जाता है। चूँकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते है इसलिए अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में भी उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है।
तुलसी के बीज को शक्कर व दूध के साथ लेने से पथरी गल जाती है।
प्याज में गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसका प्रयोग से हम किडनी में स्टोकन से निजात पा सकते है। लगभग 70 ग्राम प्या ज को पीसकर और उसका रस निकाल कर पियें। सुबह, शाम खाली पेट प्याेज के रस का नियमित सेवन करने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।

बहुत ही उत्तम माना जाता है। चूँकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते है इसलिए अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में भी उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है।15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।







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