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Wednesday, December 28, 2016

टी बी रोग से बचाओ व इलाज TB TREATMENT ,HOME REMEDIES TUBERCULOSIS

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टी बी रोग से बचाओ व इलाज  HOME REMEDIES TUBERCULOSIS 

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टीबी की बीमारी को श्रय रोग भी कहा जाता है, एक बड़ी संक्रामक बीमारी है और यह बहुत खतरनाक है! यह बीमारी एक प्रकार के माइक्रोबैकटेरियम ट्यूबरयुक्लोसिस बैक्टीरिया (जीवाणु ) के कारण होती है! यह टीबी अधिकतर फेफड़े पर ही असर करती है! फेफड़ो में होने वाली टीबी को पल्मनेरी टीबी कहा जाता है और अगर यह शरीर के किसी दुसरे भाग में होती है तो इसे एक्स्ट्रा पल्मेनरी ट्यूबरयुक्लोसिस टीबी कहा जाता है! यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वालीं बारीक बूंदों से यह इन्फेक्शन फैलता है। अगर टीबी मरीज के बहुत पास बैठकर बात की जाए और वह खांस नहीं रहा हो तब भी इसके इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। टीबी का बैक्टीरिया शरीर के जिस भी हिस्से में होता है, उसके टिश्यू को पूरी तरह नष्ट कर देता है और इससे उस अंग का काम प्रभावित होता है। मसलन फेफड़ों में टीबी है तो फेफड़ों को धीरे-धीरे बेकार कर देती है, यूटरस में है तो इनफर्टिलिटी (बांझपन) की वजह बनती है, हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है, ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, लिवर में है तो पेट में पानी भर सकता है आदि।

टीबी (श्रय) का रोग कैसे फैलता है?

यह बीमारी हवा के जरिये एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति हो फैलाती है ! हवा में इसके जीवाणु कम से कम 5 घंटे तक और उससे भी अधिक जीवित रहते है! यह बीमारी हवा के जरिये बहुत तेजी से और आसानी से फैलती है! खासी को कभी भी नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए! जूठा खाना खाने से फैलती है ,चुम्बन लार या थूक से फैलती है, रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए कपडे, तोलिया इत्यादी से ,गन्दगी से व साफ़ सफाई न रखने से ,शरीर में रोग प्रतिरोधक श्रमता के कमजोर होने से भी फैलता है |
इसके कई लक्षण हो सकते है : टीबी की शुरूआत तो हल्की खांसी के साथ होती है। लेकिन कई बार जब खांसी हफ्तों तक ठीक नहीं होती है तो टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है।
§  हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम आ रहा हो, कभी-कभार खून भी, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, इनमें से कोई भी लक्षण हो सकता है और कई बार कोई लक्षण नहीं भी होता
§  अगर रोगी को एक्स्ट्रा पल्मनेरी टीबी होती है तो उसे प्रभावित जगह से जुडी हुई परेशानिया लक्षण के रूप में दिखाई देने लगती है जैसे के आंत की टीबी में दस्त और दर्द की शिकायत होने लगती है जबकि जोड़ो (joints) के टीबी में दर्द और सुजन की समस्या होने लगती है! 
§  इस रोग में शाम को बुखार हो जाता है!
§  छाती (सीने) में दर्द की शिकायत भी होती है!
§  ब्रॉन्काइटिस में सांस लेने में दिक्कत होती है और सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आती है।
§  वजन कम होना जैसी दिक्कतें हो सकती है लेकिन आमतौर पर बुखार नहीं आता।

टीबी की जांच कैसे की जाती है (What Is The Process To Check TB )      

टीबी को जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किये जाते है जो निम्न है-

स्प्युटम टेस्ट (Sputum Test) : माइक्रोस्कोप के इस्तेमाल से मरीज के बलगम (स्प्युटम )की जाँच की जाती है, लेकिन किस कारणों की वजह से इसमे गड़बड़ी की आशंका होती है !शरीर के जिस हिस्से की टीबी है, उसके मुताबिक टेस्ट होता है। - फेफड़ों की टीबी के लिए बलगम जांच होती हैबलगम की जांच 2 दिन लगातार की जाती है। ध्यान रखें कि थूक नहीं, बलगम की जांच की जाती है। अच्छी तरह खांस कर ही बलगम जांच को दें। थूक की जांच होगी तो टीबी पकड़ में नहीं आएगी। - अगर बलगम में टीबी पकड़ नहीं आती तो AFB कल्चर कराना होता है। इस जांच में यह भी पता चल जाता है कि किस लेवल की टीबी है और दवा असर करेगी या नहीं। 

स्किन टेस्ट (Mantoux Test)-इसमे इंजेक्शन द्वारा दवाई स्किन में डाली जाती है जो 48 घंटे बाद पॉजिटिव Positive रिजल्ट होने पर टी.बी. की पुष्टि होती है!
Biopsy or Microscopic Examination- इसमे जिस जगह पर गांठ या गिल्टी होती है वह से इंजेक्शन के द्वारा द्रव liquid जाँच के लिए निकला जाता है! और जाँच के जरिये पता चल जाता है की उसमे टी.बी के जीवाणु है या नहीं! पॉजिटिव होने पर दवाई शुरू की जाती है डॉक्टर्स उसके बाद उस लिक्विड का कल्चर करते है जो 45 दिन तक या अधिक दिन तक हो सकता है!
टीबी का इलाज :- भारत सरकार और स्वास्थ्य संगठन के सम्मिलित प्रयास से टीबी के मरीजों के इलाज के लिए लगभग सभी जिला अस्पताल में डॉट केंद्र की स्थापना की गयी हैटीबी का इलाज लंबा होता है। कई बार रोगियों को छ माह से लेकर दो साल तक दवा लेनी पड़ सकती है। हालांकि सक्रिय टीबी का इलाज रेडियोलोजी के साथ-साथ माइक्रोस्कोपिक जांच तथा शरीर के तरलों की माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर पर निर्भर करता है।
1.       शहद व मक्खन शरीर के क्षय को रोकते हैं। सौ ग्राम मक्खन लेकर उसमें पचीस ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर रोजाना सेवन करें।

2.लहसुन के रस के साथ आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटें तथा लहसुन के रस को सूंघें। यह रस फेफडों को मजबूत करता है।

2.      टीबी रोगी रोजाना सौ-दो सौ ग्राम अंगूर का सेवन करें।

  1. करेले का एक चुटकी चूर्ण शहद के साथ चाटने के बाद ऊपर से वासावलेह का सेवन करें।

  1. एक पांव दूध में पांच पीपल डालकर उबालें। फिर इस दूध को सुबह-शाम समय पियें

  1. च्यवनप्राश दस ग्राम सुबह-शाम गरम दूध से लें।

  1. पीपल पांच ग्राम, पीपलामूल पांच ग्राम, धनिया चार ग्राम, अजमोद पांच ग्राम, अनारदाना पचास ग्राम, मिसरी पचीस ग्राम, काली मिर्च पांच ग्राम, बंशलोचन दो ग्राम, दालचीनी दो ग्राम और तेजपात आठ-दस पत्ते। सबका चूर्ण बना लें इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोजाना शहद, बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करें।

  1. पीपल पांच ग्राम, पीपलामूल पांच ग्राम, धनिया चार ग्राम, अजमोद पांच ग्राम, अनारदाना पचास ग्राम, मिसरी पचीस ग्राम, काली मिर्च पांच ग्राम, बंशलोचन दो ग्राम, दालचीनी दो ग्राम और तेजपात आठ-दस पत्ते। सबका चूर्ण बना लें इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोजाना शहद, बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करें।











 

 













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